आज होकर इस जहाँ से, जा रहा हूँ मैं अपरिचित, जब जिया तब था अपरिचित , ख़ुद से और संसार से । जिस ज़मीं को जानता था , जिस धरम को मानता था , चाहता था मैं जिन्हें वो लोग भी अब हैं अपरिचित । अग्नि धरा आकाश से… more →
वाणीAlok Kumar wrote 4 months ago: आज होकर इस जहाँ से, जा रहा हूँ मैं अपरिचित, जब जिया तब था अपरिचित , ख़ुद से और संसार से । जिस ज़मीं क … more →
Alok Kumar wrote 4 months ago: कई दिनों से सोये मन में आज लहर बह जाने दो , गहन विचारों के मंथन में आज कलम उठ जाने दो !! मुझे साज़ क … more →
Alok Kumar wrote 4 months ago: आज सुहानी सुबह हुई, सूरज का बुलंद सितारा है , मस्त हवा के झोंके ने, हर वृक्ष का बदन उघारा है , ऐसे म … more →
Alok Kumar wrote 1 year ago: इस दिव्य प्रभात की बेला में एक नया सा सूरज आया है, जगमग किरणों के पथ से एक नया सवेरा लाया है !! इस प … more →
Alok Kumar wrote 1 year ago: हर बंधन से दूर , अनजान शहर में रूह की गहराई से , मेरे जीवन में आता है कोई , जाता है कोई देखता हू सब … more →