तोड़कर क्राकरी जब महरी आँख दिखाती है काम छोड़ने को कह कर धमकाती है। चाय में नमक और सब्जी में चीनी पड़ जाती है सच कहूँ प्रिये तुम्हारी याद आती है। सब्जी साबुत रहती है और उंगली कट जाती है। रोटी कच्ची रह… more →
अजीत कुमार मिश्रा wrote 1 year ago: तोड़कर क्राकरी जब महरी आँख दिखाती है काम छोड़ने को कह कर धमकाती है। चाय में नमक और सब्जी में चीनी पड … more →
Tags: मल्टी लेवल मार्केटि, याद
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