देश के बुद्धिजीवियों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया था। गोलमेज सम्मेलन का विषय था कि ‘जूता बड़ा कि कलम’। यह सम्मेलन विदेश में एक बुद्धिजीवी द्वारा सरेराह जूते उछालने की घटना की पृष्ठभूमि में इस आशय … more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 5 months ago: बिना धन के कहीं भी आतंकवाद का अभियान चल ही नहीं सकता और वह केवल धनाढ़यों से ही आता है। आतंकवाद एक व् … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: देश के बुद्धिजीवियों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया था। गोलमेज सम्मेलन का विषय था कि ‘जूता बड़ा कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: देश के बुद्धिजीवियों के लिये इस समय कुछ न कुछ लिखने के लिये ऐसा आ ही जाता है जिसमें उनको संकुचित ज्ञ … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उस दिन अफलातून जी ने अंतर्जाल पर सीधे वार्तालाप के दौरान उन्होंने अपने शैशव ब्लाग का एक पाठ पढ़ने के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी भाषा में उर्दू के शब्दों का प्रयोग इतना आम है कि लोग हिंदी व उर्दू के शब्दों के अंतर का ध्यान … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पहले इस नई दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण फैलना शुरू हुआ या आतंकवाद? यह प्रश्न ऐसा ही है कि पहले मुर् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.प्रत्येक व्यक्ति की दृष्टि अलग-अलग होती है, एक ही शरीर जी तीन ढंग से देखते हैं. योगी इसे नश्वर रू … more →