वह बारिश की छीटें वह बारिश की बूँदें फिर याद आने लगीं, ख़ामोशी तेरी आँखों की हलचल तेरे होंटों की फिर से बुलाने लगी… दर्दे-दिल फिर गुनाहगार हो उसका हमें फिर दीदार हो यह ख़िज़ाँ उतर जाये देखें तुम्… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वह बारिश की छीटें वह बारिश की बूँदें फिर याद आने लगीं, ख़ामोशी तेरी आँखों की हलचल तेरे होंटों की फिर … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से मेरे जो पहली नज़्म निकली थी वह तेरे लिए थी सखी वह तेरे लिए थी तेरे मेरे ख़ाबों की ज़मीं पर सखी … more →
विनय wrote 1 year ago: वही हैं वह, वहीं हैं वह वही हैं वह, हाँ-वहीं हैं वह कल हमसे मिलीं थी जो हमने जब पूछा था उनसे वह हँसक … more →
विनय wrote 1 year ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से … more →