मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है रोज़-रोज़… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, ल … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: ऐनक उतार के ख़ुद को आइने में कभी देखा ह … more →