तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं पास मेरे जो तेरी कोई तस्वीर होती तुम्हें प्यार बेइंतिहाँ प्यार करता मैं पास जो जानाँ मेरे आज तुम होती देखो न! यह मेरी कैसी तक़दीर है न तुम हो न तुम्हारी कोई तस्वीर है … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं पास मेरे जो तेरी कोई तस्वीर होती तुम्हें प्यार बेइंतिहाँ प्यार करत … more →