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मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा

विनय wrote 1 year ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों उसे दिनो-दोपहर ढूँढ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, बाज़ार, शाम

मेरे दिल में कोई रहता है

विनय wrote 1 year ago: मैं कुछ कहता हूँ दिल कुछ कहता है मेरे ख़ाबों में न जाने कौन रहता है आया नहीं कभी वह यहाँ पर फिर भी म … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, दिल, प्यार, चेहरा, मोहब्बत, सपने, नज़र

दिल पर होने लगा इक अंजाना असर

विनय wrote 1 year ago: दिल पर होने लगा इक अंजाना असर खोने लगी है हर शाम मेरी नज़र गौर से कभी उसको देखा नहीं फिर भी पहचान लूँ … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, गलियाँ, शाम, नज़र


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