मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है रोज़-रोज़… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, ल … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है कुछ दिनो … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब मे … more →
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं तेरे दिल क … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: आतिशे-दोज़ख़ का सोज़ है दिल में आहो-फ़ुगा … more →