वह दिल में एक मस्जिद है जिसमें रोज़ नमाज़ अदा करता हूँ वह मन मन्दिर की देवी है जिसकी साँझ-सवेरे पूजा करता हूँ मैं ख़तावार हूँ गुनाहे-इश्क़ का उसके दर पे रोज़ सजदे करता हूँ वह संगदिल है नरम दिल भी अपनी जान… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वह दिल में एक मस्जिद है जिसमें रोज़ नमाज़ अदा करता हूँ वह मन मन्दिर की देवी है जिसकी साँझ-सवेरे पूजा क … more →
विनय wrote 1 year ago: जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से कुछ न कुछ बात तो सभी में थी पर हसी … more →