बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं एक पल में ही जहाँ की सारी बलाएं देखीं कभी आसमां में इतने बादल नहीं थे देखे ज़ुल्फ़ों में तेरी हमने जितनी घटाएं देखीं उनकी वफ़ाओं का बस मुक़ाबिला नहीं है यूँ तो जहाँ मे… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं एक पल में ही जहाँ की सारी बलाएं देखीं कभी आसमां में इतने बादल न … more →