हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा वो और कुछ नहीं था एक अजनबी के सिवा ना जफ़ाएं ना तक़ाज़े ना बेरुखी ना दगा हमको कुछ नहीं आता है दोस्ती के सिवा हर कदम पर नयी मंज़िलें आईं नज़र जहाँ में कुछ ना बचा आवारगी के सि… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा वो और कुछ नहीं था एक अजनबी के सिवा ना जफ़ाएं ना तक़ाज़े ना बेरुखी ना दग … more →