Blogs about: बेवजह

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तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है7 comments

विनय wrote 4 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, ज़िबह, Love, प्यार, मोहब्बत, यार, जानिब, नज़र

दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है

विनय wrote 1 year ago: दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं मे … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, हुस्न, इश्क़, Love, तन्हाई, दिल, प्यार, याद, मोहब्बत

शीशाए-अश्क आते रहे

विनय wrote 1 year ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, अश्क, इल्ज़ाम, ख़ुदा हाफ़िज़, ख़ैर, ग़लत, दर्द, दीवाना, दोस्ती


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