थकने लगी है मोहब्बत की शाम सफ़र के राही को न मिला है मक़ाम बुझने लगी है मोहब्बत की रोशनी रात का राही हो रहा है बदनाम मोहब्बत की चाँदनी ने ओढ़ ली है अमावस की काली चादर पर नज़र नहीं आते दूर तलक उनकी बेवफ़ाई… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: थकने लगी है मोहब्बत की शाम सफ़र के राही को न मिला है मक़ाम बुझने लगी है मोहब्बत की रोशनी रात का राही ह … more →