बहुत उदास-सी एक शाम बैठी है मेरे साथ अपने ख़ामोश लबों से कह देती है अनकही बातें दोनों बहुत देर तक बैठे रहते हैं एक साथ दोनों ऐसे ही रोज़ दिल का बोझ हल्का करते हैं वो चाँद की बात करती है मैं तुम्हारी बा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रAmarjeet Singh wrote 1 year ago: हर आदमी चाहता है कि उसे काम के बोझ से छुटकारा मिले, वह थोड़ा निश्चिंत रहे। निश्चिंतता को लेकर भी हर … more →
विनय wrote 2 years ago: बहुत उदास-सी एक शाम बैठी है मेरे साथ अपने ख़ामोश लबों से कह देती है अनकही बातें दोनों बहुत देर तक बै … more →