बोधिसत्व की एक कविता निषिद्ध कोई याद आता है आरती के समय भोग लगाते समय जलाभिषेक के समय नींद के समय कभी-कभी एकदम रात में जब घंटियां रो रही होती हैं पूजा की जब शंख भीतर ही भीतर सुबक रहे होते हैं कोई … more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 1 year ago: बोधिसत्व की एक कविता स्त्री को देखना दूर से पेड़ दिखता है पत्तियां नहीं, फल नहीं पास से दिखती ह … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: बोधिसत्व की एक कविता निषिद्ध कोई याद आता है आरती के समय भोग लगाते समय जलाभिषेक के समय नींद के सम … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: बोधिसत्व की एक कविता त्रिलोचन ‘सुनने में आया, हैं बीमार त्रिलोचन हरिद्वार में पड़े हैं, अपन … more →