हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ तस्वीर नहीं बनती है कभी हर्फ़ों से हर्फ़= word शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रRohit Jain wrote 1 year ago: कोई बिकाऊ चीज तू ईमान को न बोल बेकार ज़रा अपनी ही पहचान को न बोल लब्ज़ों को पढ़ते हो समझ लो तो कोई मतलब … more →
विनय wrote 1 year ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे … more →