हमारे पास और शामें नहीं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मैंने उससे कहा मुझे तुमसे कुछ कहना है उसने मेरी नज़रों को पढा़ और खिलखिलाकर हँस पड़ी झडे़ हुए फूलों की महक से मेरी जीभ बिंध गई एक और शाम खा़मोश… more →
सृजन और सरोकाररवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: हमारे पास और शामें नहीं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मैंने उससे कहा मुझे तुमसे कुछ कहना है उसन … more →