ये क्या जाने में जाना है, जाते हो खफा हो कर, मैं जब जानूं, मेरे दिल से चले जाओ जुदा हो कर, क़यामत तक उडेगी दिल से उठकर खाक आंखों तक, इसी रस्ते गया है हसरतों का काफिला हो कर, तुम्ही अब दर्द-ऐ-दिल के नाम… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: ये क्या जाने में जाना है, जाते हो खफा हो कर, मैं जब जानूं, मेरे दिल से चले जाओ जुदा हो कर, क़यामत तक … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मय पिलाकर आपका क्या जायेगा, जायेगा ईमान जिसका जायेगा, देख कर मुझको वो शरमा जायेगा, ये तमाशा किस से द … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: है इख्तियार में तेरे तो मोज़दा कर दे, वो शख्स मेरा नही है उसे मेरा कर दे, यह रेक्ज़ार कहीं खत्म ही नह … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ये भी क्या एहसान कम है देखिये न आप का, हो रहा है हर तरफ़ चर्चा हमारा आप का, चाँद में तो दाग है पर आप … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं, हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं, उन पे तूफान को भी अफ़सोस … more →