दो साल से चिट्ठा लिख रही हूँ। लिखने से ज़्यादा पढ़ लेती हूँ। सबकुछ यहाँ मिलता है। हर विधा के नए-नए रुप सामने आते रहते हैं। पर मेरा मन ब्लॉग को विधा कहने में …ता है। विधा लेखन शैली का प्रकार होती ह… more →
पसंदअफ़लातून wrote 1 month ago: मुख्य अतिथिद्वय प्रियंकर साहित्य , काम – काज की भाषा और चिट्ठेकारी इन सभी मोर्चों पर हिन्दी-से … more →
seedheebaat wrote 1 month ago: जाने कब से ये कसमसाहट सी थी… लेकिन येनकेन वजहों से भड़ास दिल में ही दबी रह जाती थी… और फ … more →