चाह गयी चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह जिनको कछु न चाहिए। वे साहन के साह कविवर रहीम का कहना है कि इस संसार में जिसकी चिंताएं और आकांक्षाएं ख़त्म हो गयीं है। वह निश्चित और बेफिक्र है वह तो मालिकों का भी मालि… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: <strong>रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय</strong … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वनि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वैसे तो अपने देख के लोगों की यह पूरानी आदत है कि वह हर तरफ अपने को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं और अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चाह गयी चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह जिनको कछु न चाहिए। वे साहन के साह कविवर रहीम का कहना है कि इस संसार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंस ते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पाहन को क्या पुजिये, जो नहिं दे जवाब अंधा नर आशा मुखी, यौं ही खोवाई आब संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय बैर, प्रीति, अभ्यास, जस, होत होत ही होय कविवर रहीम कहते हैं की पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब लगि जीवन जगत में, सुख दुख मिलन अगोट रहिमन फूटें गोट ज्यों, परत दुहुन सुर चोट कविवर रहीम कहते हैं … more →