भगवत रावत द्वारा रचित एक समूह गीत हमने चलती चक्की देखी हमने चलती चक्की देखी हमने सब कुछ पिसते देखा हमने चूल्हे बुझते देखे हमने सब कुछ जलते देखा हमने देखी पीर पराई हमने द… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 2 years ago: भगवत रावत द्वारा रचित एक समूह गीत हमने चलती चक्की देखी हमने चलती चक्की देखी हमने सब कुछ पि … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: भगवत रावत की एक कविता मेधा पाटकर करुणा और मनुष्यता की ज़मीन के जिस टुकड़े पर तुम आज़ भी अपने पा … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: वे इसी पृथ्वी पर हैं कहीं न कहीं कुछ न कुछ लोग हैं जरूर जो इस पृथ्वी को अपनी पीठ पर कच्छपों क … more →