चलो भाई चारे को बोओ अक्कड मक्कड , धूल में धक्कड, दोनों मूरख, दोनों अक्खड, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, एक साथ एक बाट से लौटे . बात बात में बात ठन गयी, बांह उठीं और मूछें तन गयीं. इसने उसकी गर्दन भींची, उ… more →
शैशवअफ़लातून wrote 3 weeks ago: अन्त कायर का कायरों को वार नहीं झेलने पड़ते और इसलिए घाव न उनकी छाती पर होते हैं न पीठ पर उनका खून बा … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: चलो भाई चारे को बोओ अक्कड मक्कड , धूल में धक्कड, दोनों मूरख, दोनों अक्खड, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, … more →