[ स्वराज के बाद का भारत जिस प्रकार गांधी वाले रास्ते से विचलित हुआ उससे भवानी बाबू का हृदय हिल उठता था । १९५९ में लिखी यह कविता , विश्व बैंक से पहली बार कर्जा लेने की बात उसी समय शुरु हुई थी । ] पहले … more →
यही है वह जगहअफ़लातून wrote 9 months ago: चलो भाई चारे को बोओ अक्कड मक्कड , धूल में धक्कड, दोनों मूरख, दोनों अक्खड, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, … more →
अफ़लातून wrote 9 months ago: [ स्वराज के बाद का भारत जिस प्रकार गांधी वाले रास्ते से विचलित हुआ उससे भवानी बाबू का हृदय हिल उठता … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: [ ‘भवानी प्रसाद मिश्र के आयाम’ , संपादक लक्ष्मण केड़िया,विशेषांक ‘समकालीन सृजन’ , २० बलमुकुंद मक्कर र … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: [ 'भवानी प्रसाद मिश्र के आयाम' , संपादक लक्ष्मण केड़िया,विशेषांक 'समकालीन सृजन' , २० बलमुकुंद मक्कर र … more →