ओ मुनिया! अरी ओ मुनिया! जल्दी से उठ जा! सुनती है न? सुनती? उठ जा! सवेरो ह्वै गयो है, लाला उठ गयो है, पड़ी सन्ना रई है! क्यूँ न उठकै आ रई है? चूरौ जर रौ ह्वै, लकरी बेकार जरेगी, तनि उठ! भैयाकू गोदी लैले,… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: ओ मुनिया! अरी ओ मुनिया! जल्दी से उठ जा! सुनती है न? सुनती? उठ जा! सवेरो ह्वै गयो है, लाला उठ गयो है, … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: धरती से है दिन और रात, फिर कैसी यह बात? झेंप मिटाने की साजिश , या बाज़ार की है ख़ारिश … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: देश-प्रेम की बात करो मत, देश-प्रेम करके दिखलाओ! वीर वो ही नहीं जो आजादी के लिए लड़े, वीर वो भी हैं … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: जब टूटी सड़कें बनने लगें, जब नेता परेशानी सुनने लगें, जब हर दुकान और दफ़्तर में, ज़ोर-ज़ोर से बहसें होने … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: हमेशा कौन जिया है? किसने अमरता का घूँट पिया है? यह तो एक पहेली है, जीवन की परम सहेली है। नक्षत्र, … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: होली का बहाना हमें प्यार है उड़ाना पहल कर दिखाना। ये रंगी हवाएं फूलों को झुलाएं हमें पास बुलाएं लेतीं … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: १ धरातल सपाट हो गया है गेंद घूमती ही जा रही है! पानी रुक नहीं पा रहा है, अरे! ब्रेक कब लगाऊँ? ढ़लान … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: ’प्यार की बात न हो तो अच्छा है, बिन बात ही प्यार होतो सच्चा है। प्यार की बात का तो अर्थ होता है, प् … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: रात और सन्नाटा! तब चुपचाप! आ ना! अतिरेक और अतिरेक! हसाना-रुलाना! और घुमाना! होश संहालने से अबतक, स … more →
प्रेमलता पांडे wrote 5 months ago: क्या कहा? तुम प्यार करते हो ? नहीं। तुम दिखावा करते हो। तुम इन्टरफ़ियर करते हो। क्या कहा? तुम मदद क … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: फूल तो खिल रहे हैं बाग़ में, पर मुझे उनका सौंदर्य रिझाता नहीं, चाँद की चाँदनी में लगे है तपिश, तारों … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: ठंड न जाए, बादल भी छाए , हवा हि सताए, तो क्या बसंत है? पतझड़ बहारें, सूखी हैं डालें, पंछी न … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: नारी तुम तो आराध्य हो, पर पुरुष कहता असाध्य हो! यह कैसी विडंबना है? पुरुष की कुरंगना है? पर तुम तो स … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: स्त्री ने आवाज उठायी है, उसने पुनः ऊँचाई पायी है, पर उससे पहले पार की एक खाई है। पहले भी वह ऊँची थी, … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: भारतवर्ष, नायाब जनतंत्र, एकता मंत्र। जाने जहान, जगत अभिमान, हिंद महान। सुयोग्य हर, हिंदी नवयुवक, ट … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: ओ दुनिया के ठेकेदारों! अपनी-अपनी कहने वालों! सबकी बात सुनो! वरना चुप रहो। आज क्लांत वसुंधरा है, भ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: फूलों का पालना सा, लगता था तेरा आँचल। तेरा हाथ फिरता सर पर, देता था मन को ताकत। तेरा बार-बार स … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: अवरोध १ हम भटक गए हैं, जोड़ों से चटक गए हैं। नैतिकमूल्य सूख गए हैं, सूखकर जम गए हैं। लिहाज़ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: ये मौसम सुहाना होली का बहाना हमें प्यार है उड़ाना पहल कर दिखाना। ये रंगी हवाएं फूलों को झुलाएं हम … more →