जब भी हम ढूढ़ते हैं अपने लिए प्यार पर मिलती है सब जगह से दुत्कार खुद करो चाहे किसी से भी तुम मांगो न किसी से इसका उपहार लोग नहीं निकल पाते अपने दिल से खरीदा और बिकता पैसे से यहाँ प्यार भाषा में बहुत … more →
** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrikasonyagee wrote 4 months ago: ज़िन्दगी के मायने कुछ धुंधलाने लगे है “फार्मोलों “से आगे “बिज़नस सूट “आने लग … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जब भी हम ढूढ़ते हैं अपने लिए प्यार पर मिलती है सब जगह से दुत्कार खुद करो चाहे किसी से भी तुम मांगो … more →
विनय wrote 1 year ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में … more →