आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं तबीब == Healers उम्र की दुआ न दो धड़कनें मुहीब हैं मुहीब == Dreadful आपको भी प्यार है आप बदनसी… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 9 months ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं तबीब == He … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →
Rohit Jain wrote 10 months ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आपको अब भी बहुत कुछ देखना है आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है चाँद तक जाने की राहें खोज लीं दिल से दिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे बंद आँखों में छुपा के प्यार रख लेंगे एक पल क्या है तू जो कह दे तो तम … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मुझसे भी रकीबों की तरह बात ना करो मेरी ही बाज़ी में मुझे तुम मात ना करो इक बार तो कह दो मुझे तुम अपना … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते एक तकल्लुफ़ ही सही जिसको निभाते जाते क्या ख़ता थी के टूट गये ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मुस्कुराने पर भी कर्ज़ है दिल को ये कैसा मर्ज़ है अश्क़ों से कहो मुँह ना फेरें इनका भी कुछ फ़र्ज़ है ये ज … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है ज़िंदगी का एक और सफ़हा मोड़ दिया है आज फिर सोचा के चुन लूँ ख़ार कुछ नये … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ नशा कराके तो सब ही गिराया … more →