भूख एक बेबाक बयान है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) भूख के बारे में शब्दों की जुगाली साफ़बयानी नहीं हो सकती भूख पर नहीं लिखी जा सकती कोई शिष्ट कविता भूख जो कि कविता नहीं कर सकती उल्टी पडी डेगचियों … more →
सृजन और सरोकारprithvi wrote 5 days ago: आज मैं कुछ कहना चाहता हूं. मेरी बात सुनकर कुछ लोग चौंकेंगे और शायद हंसेंगे भी कि महाभारत का कर्ण कैस … more →
K M Mishra wrote 4 months ago: देश के 141 जिले सूखे की चपेट में हैं । लोगों को आवश्यक सामानों की मूल्य वृद्धि के लिये तैयार रहना चा … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 7 months ago: भूख एक बेबाक बयान है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) भूख के बारे में शब्दों की जुगाली साफ़बयानी नह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: गरीब का जीना क्या मरना क्या अमीर का जीतना क्या हारना क्या इस जीवन को सहज भाव से वही बिता पाते हैं जो … more →