रचना: पंडित नरेंद्र शर्मा स्वर: भूपेन हजारिका विस्तार है अपार प्रजा दोनों पार करे हाहाकार निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यों नैतिकता नष्ट हुयी, मानवता भ्रष्ट हुयी निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यों… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: पंडित नरेंद्र शर्मा स्वर: भूपेन हजारिका विस्तार है अपार प्रजा दोनों पार करे हाहाकार निःशब्द सद … more →