हम कवि हैं या मसखरे सब को हँसाते जनता का दिल लुभाते कविता याने कि कैसी हो बहती नदी जैसी हो पहले कविता लिखी छन्द में बोले संपादक जी – अमां यार कुछ नया लिखो कि कविता संवरे क्या ये कलि और भंवरे! गय… more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: हम कवि हैं या मसखरे सब को हँसाते जनता का दिल लुभाते कविता याने कि कैसी हो बहती नदी जैसी हो पहले कवित … more →