Lost your password?

Blogs about: मंच

Featured Blog

रोना चाहता है 1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 3 weeks ago: गम भुलाकर दिमाग खुश होना चाहता है ये दुखी दिल जी भर के अब रोना चाहता है ढो लिये चाँद-तारे आकाश उकता … more →

Tags: हिन्द-युग्म, गज़ल

मण्डी बनाया विश्व को1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: लुढ़कता पत्थर शिखर से, क्यों हमें लुढ़का न देगा क्रेन पर ऊँचा चढ़ा कर, चैन उसकी तोड़ दी लोभ का दर्शन बना … more →

Tags: गीत, हिन्द-युग्म, अमेरिका, अर्थ-व्यवस्था, ऋण, मन्दी, हरिहर झा

छलना!2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: घुटन है दिल में बहुत, नाराज दोनो रब जहाँ प्रश्न तो सुलझा नहीं, तू कौन है और है कहां ? पी गया आंसू, ज … more →

Tags: गीत, हिन्द-युग्म, आक्रोश, छलना, विरह, शोकाकुल

आश्वासन

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मन्त्रीजी स्वर्ग सिधारे ( नरक के बदले ) शायद चित्रगुप्त की भूल या खिलाया कम्प्यूटर ने गुल नकली दया द … more →

Tags: अतुकांत, व्यंग्य, हिन्द-युग्म, मन्त्री, स्वर्ग, नरक, आश्वासन, भ्रष्टाचार

आश्वासन 21 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: ( पिछ्ली कविता का शेष ) चित्रगुप्त ने जवाब दिया हँसते हुये - “कैसा स्वर्ग मत्रींजी ! याद कीजिये आपने … more →

Tags: अतुकांत, व्यंग्य, हिन्द-युग्म, मन्त्री, स्वर्ग, नरक, आश्वासन, भ्रष्टाचार

आकाश की ओर 1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: ( अति मह्त्वाकांक्षी लोग…   क्या क्या गुल खिलाती हैं उनकी हीन ग्रन्थियां…)  पिकनिक पॉइन्ट पर खड़ा मैं … more →

Tags: अतुकांत, हिन्द-युग्म, मह्त्वाकांक्षा, मह्त्वाकांक्षी, हीन-ग्रन्थि

हम कवि हैं या मसखरे4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: हम कवि हैं या मसखरे सब को हँसाते जनता का दिल लुभाते कविता याने कि कैसी हो बहती नदी जैसी हो पहले कवित … more →

Tags: अतुकांत, व्यंग्य, हिन्द-युग्म, कवि, मंचीय कविता, महादेवी वर्मा

खिलने दो खुशबू पहचानो

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: विषम स्थिति हो लोग पराये फिर भी सब मे ईश्वर जानो भांति भांति के फूल जगत मे खिलने दो खुशबू पहचानो   अ … more →

Tags: तुकान्त, अनुभूति

कारगील हो या गेलीपोली*1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मौत से आंखमिचोली कारगील हो या गेलीपोली    जंग की शतरंज का वादा कोई वजीर ना प्यादा सीने मे लगती जब गो … more →

Tags: तुकान्त

हम बहुत ही बोर हुये12 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: बचपन की सहपाठिन मिल गई शुरू हुये ईमेल बीवी ने जब बांच लिये तो खतम हो गया खेल पूछपरछ मे धमधम गीरते बर … more →

Tags: हास्य, व्यंग्य

नंगा बोल पड़ा4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago:                         कंगला डूबा चिन्ता मे तू मुझे लूट कर क्यों ले जाय नंगा बोल पड़ा हाय! तू मेरे क … more →

Tags: हास्य, तुकान्त, व्यंग्य

भरम भारी पिटारा खाली5 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: राजनीति के दावपेंच मे चला अगर ना सिक्का  जाली लोग हमीं को देंगे गाली भरम भारी पिटारा खाली जम कर जेब … more →

Tags: हास्य, व्यंग्य

नखरारी नार3 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर के मचलती कैसे बौछार तीर की निकलती ज्वाला चमकार बिजली की झूमती बाल … more →

Tags: तुकान्त, रचनाकार, हिन्दीनेस्ट

पतझड़*2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago:  -हरिहर झा आंसू मे डूबी वीणा ले मधुर गीत मै कैसे गाता बचपन मेरा सूखा पतझड़ हरियाली मै कैसे लाता खेलकू … more →

Tags: तुकान्त, अनुभूति

मां की याद

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मां के हाथों की बनी जब दाल रोटी याद आई पंचतारा होटलों की शान शौकत कुछ न भाई    बैरा निगोड़ा पूछ जाता … more →

Tags: तुकान्त, अनुभूति, साउथ एशिया टाइम्स

चुप हूं

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: खुल कर रोया था जनमने के बाद हालात अब ये है कि बरसों से चुप हूं। अंदाज़े-बयां था कातिल का जुर्म किसका … more →

Tags: शेर, अनुभूति, साउथ एशिया टाइम्स

प्रीत के गीत

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: कोयलिया प्रीत के गीत गाने लगी दिल धड़कता रहा मन मचलने लगा चांदनी श्वेत परिधान से सज गई खिलखिलाता पवन … more →

Tags: तुकान्त, अनुभूति

ऐसा बोर सैयां

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: रंग फेका लाल गुलाबी वो वेवलेन्थ की बात करने लगा बुद्धु नादान सैयां आइन्स्टीन को मात करने लगा मैंने छ … more →

Tags: अतुकांत, व्यंग्य, हिन्दीनेस्ट

मदिरा ढलने पर

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: नजरों से गश आया साकी मदिरा ढलने पर क्या होगा। प्यास बुझाने पानी मांगा अमृत की अब चाह नहीं नन्हा दीपक … more →

Tags: तुकान्त, हिन्दीनेस्ट


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS