Blogs about: मंच
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आकाश की ओर
( अति मह्त्वाकांक्षी लोग… क्या क्या गुल खिलाती हैं उनकी हीन ग्रन्थियां…) … more »
हरिहर झा
आकाश की ओर
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: ( अति मह्त्वाकांक्षी लोग… क्या क्या … more »
हम कवि हैं या मसखरे
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 6 months ago: हम कवि हैं या मसखरे सब को हँसाते जनता क … more »
BSNL DataOne Broadband Connection and Linux Ubuntu in Kanpur Lucknow
oskanpur wrote 6 months ago: कानपुर लखनऊ व सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश म … more »
खिलने दो खुशबू पहचानो
Harihar Jha हरिहर झा wrote 7 months ago: विषम स्थिति हो लोग पराये फिर भी सब मे ई … more »
कारगील हो या गेलीपोली*
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 10 months ago: मौत से आंखमिचोली कारगील हो या गेलीपोल … more »
हम बहुत ही बोर हुये
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 11 months ago: बचपन की सहपाठिन मिल गई शुरू हुये ईमेल … more »
नंगा बोल पड़ा
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: कंगला डूबा चिन्ता म … more »
भरम भारी पिटारा खाली
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: राजनीति के दावपेंच मे चला अगर ना सिक्क … more »
नखरारी नार
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: पिचकारी खेले ससुरी ऐसे रंग फेंक कर क … more »
पतझड़*
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Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: -हरिहर झा आंसू मे डूबी वीणा ले मधुर गी … more »
मां की याद
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मां के हाथों की बनी जब दाल रोटी याद आई प … more »
चुप हूं
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: खुल कर रोया था जनमने के बाद हालात अब ये … more »
प्रीत के गीत
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: कोयलिया प्रीत के गीत गाने लगी दिल धड़कत … more »
ऐसा बोर सैयां
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: रंग फेका लाल गुलाबी वो वेवलेन्थ की बात … more »
मदिरा ढलने पर
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: नजरों से गश आया साकी मदिरा ढलने पर क्य … more »
बन कविता मुस्कुराती
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मन मे पीड़ा जब सताती, बन कविता मुस्कुरा … more »
मौन मुखर!*
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: कैसे मन की अगन बुझे राख मे शोल़े … more »
दिल का दर्द
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: खोईखोई उलझनो का कुछ तो राज है क्या करे … more »
अंधेरा
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: अंधेरा अंधेरा कहां है उजाला रोज वही सू … more »
