ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में पायेगा जब उस ख़ुदा ने अर्श को और फ़र्श को बांटा नहीं फिर चैन कैसे आदमी इन सरहदों में पायेगा घर में जाके देख तो बच्चे हैं कुछ … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में पायेगा जब उस ख़ुदा ने अर … more →