ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है कोई और ही देखो आईना यहाँ क़द के बराबर है कोई कश्ती हर बदन की ड़ूबती मिट्टी में है ये ज़मीं है रब के या फ़… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है क … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ रास्ते मुश्किल किये पास आ रहीं हैं दूरियाँ हर क़दम पर बिछ र … more →