Blogs about: मंज़िल

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तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन2 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »

Tags: मेरा गीत

ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया2 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »

Tags: मेरा गीत

पहली नज़र का पहला प्यार7 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना म … more »

Tags: मेरा गीत

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 2 months ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नह … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007

ख़ामोशी ही ख़ामोशी है2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों मे … more »

Tags: मेरा गीत

जब प्यार किसी से होता है

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है कुछ दिनो … more »

Tags: मेरा गीत

यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जा … more »

Tags: मेरा गीत

कब कहाँ रुकें, कब तक चलें

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहा … more »

Tags: मेरा गीत

जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ सुबह-शाम

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-श … more »

Tags: मेरा गीत

ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह1 comment

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिन … more »

Tags: मेरा गीत

मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ1 comment

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ ख़ुद स … more »

Tags: मेरा गीत

दिल में तू नहीं तो क्या है सखी

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: दिल में तू नहीं तो क्या है सखी मान ले तू … more »

Tags: मेरा गीत

सफ़र बहुत तवील है2 comments

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: बहारों का मौसम शाख़ों पर खिलने लगा है … more »

Tags: फुटकर कलाम

मैं मंज़िल से दूर सही

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: मैं मंज़िल से दूर सही ख़ाबों का एक घरौं … more »

Tags: फुटकर कलाम

मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: मेरा   दर्द    मेरा   दु:ख   मेरा  अपना     … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं

विनय प्रजापति wrote 7 months ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अप … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा

विनय प्रजापति wrote 7 months ago: अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा दे … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल


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