Blogs about: मंज़िल

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सहर-ब-सहर मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ9 comments

विनय wrote 3 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, नूर, दोस्त, दर्द, Love, तन्हाई, Pain, दुआ, घर

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

जब प्यार किसी से होता है

विनय wrote 1 year ago: एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है कुछ दिनों से दिल पर छायी है शायद, शायद ऐसा तब लगता है जब प्यार किसी से … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, इश्क़, बेताब, Heart, Love, दिल, प्यार, ख़ुशबू

यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे

विनय wrote 1 year ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही मगर यह दिल किसी का होना चाहे जबसे मेरी … more →

Tags: मेरा गीत, रंग, इश्क़, Love, मौसम, दिल, प्यार, मोहब्बत, नज़र

कब कहाँ रुकें, कब तक चलें

विनय wrote 1 year ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ कहानियाँ कहती हों व … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, सफ़र, वफ़ा, अरमान, वादे

जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ सुबह-शाम

विनय wrote 1 year ago: जिसकी यादों में गुज़ारता हूँ मैं सुबह-शाम मंज़िल वह मेरी वह मेरा आख़िरी मुक़ाम वह रंगीन शाम थी शाम वह ग … more →

Tags: मेरा गीत, नूर, Love, Reminisce, दिल, चेहरा, मुक़ाम, वफ़ा, शाम

ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह1 comment

विनय wrote 1 year ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, गुल, दिल, प्यार, नाम, मोहब्बत, सफ़र

मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ1 comment

विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ कभी दिल कहे उसे अपना बना लूँ कभी दिल … more →

Tags: मेरा गीत, वक़्त, इश्क़, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, दीवाना, ख़फ़ा

दिल में तू नहीं तो क्या है सखी

विनय wrote 1 year ago: दिल में तू नहीं तो क्या है सखी मान ले तू, हम तेरे हैं हमनशीं चाँदनी और सितारों की सरज़मीं महकती हवा औ … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, ख़ाब, ख़ुशबू, चाँदनी, डाली, दिल, दीवाना, प्यार

सफ़र बहुत तवील है2 comments

विनय wrote 1 year ago: बहारों का मौसम शाख़ों पर खिलने लगा है मज़िलों की बेताबी का चाँद अब दिखने लगा है सफ़र बहुत तवील है और ल … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, चाँद, तवील, प्यार, बेताबी, मुख़्तसर, मोहब्बत, brief

मैं मंज़िल से दूर सही

विनय wrote 1 year ago: मैं मंज़िल से दूर सही ख़ाबों का एक घरौंदा रखता हूँ बेवजह ही सही लेकिन किसी से मुहब्बत करता हूँ शायिर: … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, ख़ाब, घरौंदा, प्यार, मुहब्बत, मोहब्बत, dream, Final Destination

मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है

विनय wrote 1 year ago: मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है बाक़ी सब झूठ है यह सच्चा सपना है कल तक लबों पर उसके लिए दुआ थी आज दु … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, अधूरा, इश्क़, खेल, जादू, झूठ, दर्द, दुख, दुआ

तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं

विनय wrote 1 year ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, असर, इश्क़, कोहरा, गली, चाहत, दुआ, धूप, नगर


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