मलार मठा खींच को लोंदा। जेवत नंद अरु जसुमति प्यारो जिमावत निरखत कोदा॥ माखन वरा छाछ के लीजे खीचरी मिलाय संग भोजन कीजे॥ सखन सहित मिल जावो वन को पाछे खेल गेंद की कीजे॥ सूरदास अचवन बीरी ले पाछे खेलन को चि… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: मलार मठा खींच को लोंदा। जेवत नंद अरु जसुमति प्यारो जिमावत निरखत कोदा॥ माखन वरा छाछ के लीजे खीचरी मिल … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: लाल कछु कीजे भोजन तिल तिल कारी हों वारी हों। अब जाय बैठो दोउ भैया नंदबाबा की थारी हो॥१॥ कहियत हे आज … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: पतंग की गुडी उडावन लागे व्रजबाल॥ सुंदर पताका बांधे मनमोहन बाजत मोरन के ताल॥१॥ कोउ पकरत कोउ खेंचत कोउ … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: ग्वालिन मेरी गेंद चुराई। खेलत आन परी पलका पर अंगिया मांझ दुराई॥१॥ भुज पकरत मेरी अंगिया टटोवत छुवत छं … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: तरणि तनया तीर आवत हें प्रात समे गेंद खेलत देख्योरी आनंद को कंदवा। काछिनी किंकणि कटि पीतांबर कस बांधे … more →