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Blogs about: मजदूर

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जब औजार क्रांति की माँग करते हैं 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के आलेख  उद्यम और श्रम की इन टिप्पणियों को  देखें ; अभिषेक ओझा said… … more →

Tags: क्रांति, आंदोलन, समाजवाद, पूंजीवादी संकट, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, उदारीकरण, पूँजी

यहां ठग कौन है-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: ‘एक के तीन’, और ‘दो के छह’ की आवाज कहीं भी सुन लें तो हम भारतीयों के कान खड़े हो जाते हैं यह सोचकर कि … more →

Tags: चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, लेखक, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, hasya

मैं कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत की इतनी सरल प्रस्तुति सुन रही थी...2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: जैक लंडन का उपन्यास - देखें : \’आयरन हील\’ और अतिरिक्त मूल्य का नियम सपने का गणित अर्नेस … more →

Tags: कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स

चीनी विशेषता वाले ''समाजवाद'' में मज़दूरों के स्वास्थ्य की दुर्गति

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस साईट पर फ़िलहाल नया प्रकाशन बंद कर दिया गया है क्योंकि ‘नई समाजवादी क्रांति का उद्घोषक … more →

Tags: आंदोलन, क्रांति, बिगुल, समाजवाद, सर्वहारा, शोषण-उत्पीड़न, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, श्रमशक्ति, मजदूरों का जीवन

मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन जब मज़दूरों के बहते ख़ून से जन्मा लाल झण्डा मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ … more →

Tags: आह्वान, कम्युनिस्ट, बिगुल, सर्वहारा, संघर्ष, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, मजदूरों का जीवन, मजदूरों के हक़

मेट्रो कर्मचारियों का आन्दोलन

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: दमन-उत्पीड़न से नहीं कुचला जा सकता मेट्रो कर्मचारियों का आन्दोलन दिल्ली मेट्रो की ट्रेनें, मॉल और दफ् … more →

Tags: आंदोलन, चर्चा है कि, बिगुल, सर्वहारा, संघर्ष, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, मजदूरों का जीवन, मजदूरों के हक़

बच्चों के खून-पसीने से बन रही है बेंगलोर मेट्रो3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: बिगुल संवाददाता कारपोरेट जगत में हमेशा ही मजदूरों का मनमाना शोषण होता रहा है लेकिन अब सरकारी उपक्रम … more →

Tags: अनुराग, चर्चा है कि, बिगुल, ललकार, सर्वहारा, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, मजदूरों का जीवन, सस्ती श्रमशक्ति

मई दिवस पर याद किया मज़दूरों की शहादत को

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: बिगुल संवाददाता गोरखपुर नौजवान भारत सभा, बिगुल मज़दूर दस्ता और अखिल भारत नेपाली एकता मंच ने मिलकर अन् … more →

Tags: आंदोलन, आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, सर्वहारा, इन्कलाब, मई दिवस, मजदूरों के हक़

चुनावी नौटंकी का पटाक्षेप: अब सत्ता की कुत्ताघसीटी शुरू

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: जनता को सिर्फ यह तय करना है कि वह इसे कितना और बर्दाश्त करेगी! बिगुल डेस्क करीब डेढ़ महीने तक चली देश … more →

Tags: आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, शोषण-उत्पीड़न, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, संसदवाद

`बिगुल´ के लक्ष्य और स्वरूप पर एक बहस और हमारे विचार

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: (बिगुल, अप्रैल 1999) `बिगुल´ का पाठक कौन है? मज़दूरों के किस हिस्से तक पहुँचना इसका मकसद है? – … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, लेनिन, सर्वहारा, मजदूरों के हक़, वर्ग दृष्टिकोण

कुछ ज्यादा ही लाल... कुछ ज्यादा ही अन्तरराष्ट्रीय 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: (बिगुल के स्वरूप पर आत्माराम का पत्र) (जुलाई-अगस्त 1996) कुछ ज्यादा ही लाल… कुछ ज्यादा ही अन्त … more →

Tags: आंदोलन, आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मार्क्सवाद, लेनिन

एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: विशेष सम्पादकीय (बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995) आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेह … more →

Tags: आंदोलन, आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मार्क्सवाद, लेनिन

नींद से जागो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा ह … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, भगत सिंह, ललकार, समाजवाद, सर्वहारा, हिन्दी साहित्य, शिक्षा, शोषण-उत्पीड़न

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! ..अंतिम किश्त

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: उपरोक्त संक्षिप्त चर्चा के आलोक में मज़दूर साथियों के लिए यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि मई दिवस क … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मार्क्सवाद, लेनिन, समाजवाद

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! ...दूसरी किश्त

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: इस पोस्ट की प्रथम किश्त ..मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! आम मज़दूर साथिय … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: एक बार फ़िर मुक्ति का परचम उठाओ! पूँजी की बर्बर सत्ता के खिलाफ़ फैसलाकुन लड़ाई की तैयारी में जुट जाओ!! … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मार्क्सवाद, सर्वहारा, संघर्ष

भारत की तरक्की के दावों की ढोल की पोल : समृद्धि के तलघर में नर्क का अँधेरा

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: नवउदारवादी अर्थनीति के 18 वर्ष 18 वर्षों पहले नरसिंह राव की सरकार ने जब उदारीकरण-निजीकरण की नीतियों … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, सर्वहारा, खाद्य संकट, पूंजीवादी संकट, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, वैकल्पिक मीडिया, मजदूरों का जीवन

उजड़ने, बसने फिर उजड़ने की त्रासदी

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: अगर आप राजधानी दिल्ली को केवल शॉपिंग मॉलों, शॉपिंग कॉम्प्लैक्सों, गगनचुम्बी इमारतों, मेट्रो, खूबसूरत … more →

Tags: ललकार, सर्वहारा, अनुभव, मजदूरों का जीवन, वर्ग दृष्टिकोण, Delhi-where live 40 lacs of peaple in jhuggi jhompadi

आपस की बात-हर कोई लूट रहा है मजदूर को

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: मैं लुधियाना की अनेक कम्पनियों में काम कर चुका हूँ लेकिन हर प्राईवेट कम्पनी के मालिकों का व्यवहार एक … more →

Tags: ललकार, सर्वहारा, अनुभव, मजदूरों का जीवन, वर्ग दृष्टिकोण


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