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Blogs about: मतलब

मतलब से ही जनम लेता है कोई रिश्ता6 comments

विनय wrote 1 year ago: मतलब से ही जनम लेता है कोई रिश्ता मतलब से ही मिट जाता है वह रिश्ता तख़लीक़ के इस भँवर में तकलीफ़ है बह … more →

Tags: रुबाइयाँ, जनम, तख़लीक़, बहुत, भँवर, रिश्ता, सँभलकर, Birth, care

मैं सबसे बुरा था 4 comments

विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →

Tags: मेरा गीत, अक्स, अच्छा, अफ़सोस, आईना, आदत, ख़ुशबू, ग़ैर, चाह

मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब1 comment

विनय wrote 1 year ago: मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब मैं मतलबी नहीं आशिक़ तुम्हारा हूँ तुम ख़ुदगर्ज़ हो या कोई मासूम पहेली? … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, आशिक़, Selfish, Lust, पहेली

और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते

विनय wrote 1 year ago: और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते वह हमसे अय्यारी नहीं तो और क्या फ़रमाते हमारी क़िस्मत में जीते-जी फ़ना … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, अय्यारी, इश्क़, ख़ुदा, दिल, दुश्मन, दोस्त, प्यार, मात

अगर आँख रोये

विनय wrote 1 year ago: अगर आँख रोये और दिल सिसकियाँ भरे तो भला बोलो आशिक़ ऐसे में क्या करे इक वो दिन था इक ये आज का दिन है म … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, आँख, आशिक़, आह, इश्क़, ख़ुदा, ख़ुश, नज़र, पत्थर दिल

माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग

विनय wrote 2 years ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतलब निकालते हैं लोग हुआ कब मुझ से उनका बुरा किसलिए नाम मेरा उछाल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, आदत, कहानी, ग़लफ़हमी, नमक, नाम, बुरा, माज़ी, मिर्च

एक गिरह ज़ुबाँ में

विनय wrote 2 years ago: एक गिरह ज़ुबाँ में, सब के होती है वक़्त लगते ही लफ़्ज़ अटका देती है लोग क्या समझते हैं मैं ना-पाक हूँ या … more →

Tags: मेरी नज़्म, Alone, कपाट, कलम, गिरह, तन्हा, दरवाज़े, पुरज़े, बयाँ


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