मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला, ‘किस पथ से जाऊँ?’ असमंजस में है वह भोलाभाला, अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ - ‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।’। ६।… more →
La Vida LocaPraful wrote 8 months ago: स्वयं नहीं पीता, औरों को, किन्तु पिला देता हाला, स्वयं नहीं छूता, औरों को, पर पकड़ा देता प्याला, पर … more →
Praful wrote 8 months ago: बजी न मंदिर में घड़ियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्ज़िन देकर मस्जिद में ताला, लुटे ख … more →
Ajad Panchhi wrote 8 months ago: मधुशाला *************************************************************** मृदु भावों के अंगूरों की आज … more →
Praful wrote 8 months ago: हाथों में आने से पहले नाज़ दिखाएगा प्याला, अधरों पर आने से पहले अदा दिखाएगी हाला, बहुतेरे इनकार करेग … more →
Praful wrote 8 months ago: जब हाला, अधरों की आतुरता में ही जब आभासित हो प्याला, बने ध्यान ही करते-करते जब साकी साकार, सखे, रहे … more →
Praful wrote 9 months ago: मधुशाला *************************************************************** मृदु भावों के अंगूरों की आज … more →
Rakesh wrote 1 year ago: An atheist professor of philosophy speaks to his class on the problem science has with God, The Almi … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: चंचल आंखों की पीड़ा से छलक रहा क्यों जाम आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम कैसे बच पायेगा पंख … more →
Rakesh wrote 1 year ago: मदिरा पीने की अभिलाषा ही बन जाए जब हाला, अधरों की आतुरता में ही जब आभासित हो प्याला, बने ध्यान ही कर … more →
Rakesh wrote 1 year ago: मधुर भावनाओं की सुमधुर नित्य बनाता हूँ हाला, भरता हूँ इस मधु से अपने अंतर का प्यासा प्याला, उठा कल्प … more →
Rakesh wrote 1 year ago: मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लग … more →