अपने अश्को से आज तेरा दामन भीगा दूँ मुझको ऐ जान मेरी इतनी इजाज़त दे दो ना जाने किन जमानो से मैं सोया नही हूँ अपने आँचल में छिपा लो , मुझको सुला दो मैं अपनी तक़दीर से लड़ता अकेला थक गया हूँ साथ मेरे आ … more →
वाणीAlok Kumar wrote 1 year ago: अपने अश्को से आज तेरा दामन भीगा दूँ मुझको ऐ जान मेरी इतनी इजाज़त दे दो ना जाने किन जमानो से मैं सोया … more →
vikash wrote 2 years ago: जिंदगी की राह-ए-गुजर में यार मेरा था पुराना आईने ने भी कर दिया मुझसे अब तो ये बहाना दिल दिया है जिसक … more →