१.धर्मज्ञ राजा को जातियों, धर्मों, राज्य के धर्मों, श्रेणी धर्मों(व्यवसाय के प्रकार से नियत धर्मों) तथा कुल धर्मों को अच्छी तरह समझकर अपने धर्म का अनुसरण करना चाहिऐ. २.जाति, देश और कुल धर्मानुसार अपन… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****योगेन्द्र जोशी wrote 3 months ago: ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते …’ कहते हुए समाज में स्त्रियों को सम्मान मिलना चाहिए की बात अक्सर सु … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको देखने के लिय मचलता है मन अगर वह पास आते हैं तो हो जाता है अमन बातें होतीं हैं प्यारी कभी होती … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.एक सज्जन व्यक्ति के घर से बैठने या विश्राम के लिए भूमि, तिनकों से बने आसन, जल तथा मृदु वचन कभी दूर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.अपनी क्षीण वृति, अर्थात आय की कमी से तंग होकर जो व्यक्ति रास्ते में पड़ने वाले खेत से कुछ कंद-मूल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिस कार्य को करने से प्रत्यक्ष रूप में अच्छा फल नहीं मिलता हो उसे करने का प्रयास नहीं करना चाहिए, … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड दे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: १.धर्मज्ञ राजा को जातियों, धर्मों, राज्य के धर्मों, श्रेणी धर्मों(व्यवसाय के प्रकार से नियत धर्मों) … more →