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Blogs about: मनुस्मृति

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‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ इत्यादि - मनुस्मृति के वचन2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 3 months ago: ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते …’ कहते हुए समाज में स्त्रियों को सम्मान मिलना चाहिए की बात अक्सर सु … more →

Tags: नीति, प्राचीन-भारत, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, Morals, यत्र नार्यस्तु पूज्, हिंदू समाज, Hindu society, manusmriti

मनुस्मृति- कठिन जगह पर जाने से बचें

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, Friends

इन्सान जमीन पर कटते रहे-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →

Tags: कविता, नज़रिया, शायरी, व्यंग्य, भारत, Education, Internet, शब्द, web duniya

कभी उजड़ता तो कभी महकता है चमन-कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको देखने के लिय मचलता है मन अगर वह पास आते हैं तो हो जाता है अमन बातें होतीं हैं प्यारी कभी होती … more →

Tags: Blogroll, Kavita, शेर-ओ-शायरी, inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, शेर, अनुभूति

मनुस्मृति:एक दिन से अधिक ठहरने वाला अतिथि नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.एक सज्जन व्यक्ति के घर से बैठने या विश्राम के लिए भूमि, तिनकों से बने आसन, जल तथा मृदु वचन कभी दूर … more →

Tags: Blogroll, Hindi friends, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi sahity, hindu dharm

मनुस्मृति:अपराधियों को अनदेखा न करे राज्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.अपनी क्षीण वृति, अर्थात आय की कमी से तंग होकर जो व्यक्ति रास्ते में पड़ने वाले खेत से कुछ कंद-मूल … more →

Tags: Blogroll, Hindi friends, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep

मनुस्मृति:दूसरे के जूते नहीं पहनना चाहिये2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिस कार्य को करने से प्रत्यक्ष रूप में अच्छा फल नहीं मिलता हो उसे करने का प्रयास नहीं करना चाहिए, … more →

Tags: arebic, आध्यात्म, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, हिंदी साहित्य, हिन्दी, bharat, Blogroll

मनुस्मृति:सभी के निद्रा मी चले जाने पर दंड ही जाग्रत रहता है

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड दे … more →

Tags: Blogroll, hindi kavita, Hindi friends, hindi journlism, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, hindi sahity

मनुस्मृति-राजा का कर्तव्य है धर्म की रक्षा करना

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: १.धर्मज्ञ राजा को जातियों,  धर्मों, राज्य के धर्मों, श्रेणी धर्मों(व्यवसाय के प्रकार से नियत धर्मों) … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, धर्म, Life, Internet, arebic, Bloging, Education, Friends


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