जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है पूँजीवाद के पास इस संकट से निकलने का कोई उपाय नहीं विश्व पूँजीवाद के तमाम सरगनाओं की हरचंद कोशिशों के बावजूद व… more →
बिगुलHarihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: लुढ़कता पत्थर शिखर से, क्यों हमें लुढ़का न देगा क्रेन पर ऊँचा चढ़ा कर, चैन उसकी तोड़ दी लोभ का दर्शन बना … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है पूँजीवाद क … more →