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Blogs about: मन

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बहुत कोशिश की5 comments

Nidhi KM wrote 2 weeks ago: कदमों से कदमों को, मिलाने की बहुत कोशिश की, कभी मैं आगे बढ़ गयी, कभी तुम पीछे रह गये, बातों को बातों … more →

Tags: कविताएँ, दिल से दिल की बात..., nidhi, मैं, तुम, I, निधि, कदम, कभी

मन खोलने से पहले ज़रा सोचें…5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: मन खोलने से पहले ज़रा सोचें… अपनी बात कहने के अनेक ढंग हैं। रोने, हंसने, गाने, बजाने, नृत्य, लेखन, चि … more →

Tags: त्योहार, लेख/आलेख, ईद

रहीम संदेशः अच्छी नीयत से काम करें तो मनुष्य क्या परमात्मा मिल जाते हैं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: <strong>रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय</strong … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी

जाने वो पल कहाँ खो गए8 comments

kmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →

Tags: Zindagi, Kavita, muskan, hindi, Poetry, kala, Blogroll, पल, चाँद

मन में हैं दस-बीस...1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: सतरंगी भाव उमड़ते हैं, दौड़ते हैं, तेज़ दौड़ते हैं इतने तेज़ कि कुछ स्पष्ट नहीं रह पाता मानो ऊर्जा से चाल … more →

Tags: लेख/आलेख, सतरंगी भाव, सोच

मेरे मन 1 comment

माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: मन तुझे खुली छूट है उदास होने के लिए, आंसू बहा – बहा रोने के लिए तू चाहे तड़पना अगर तो तड़प जी … more →

Tags: मेरी कवितायें, खुशी

यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया2 comments

विनय wrote 1 year ago: यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह बदलना था तुम्हें तो मुझ … more →

Tags: रुबाइयाँ, Heart, Mind, सावन, दिल, rain, ग़म, तेवर, रोना

उजाले तक2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: सनक गई सकून मिला अन्धेरे से उजाले तक दावा नहीं दया पहुंची जीगर के छाले तक लेपटोप पंहुच गये गांव में … more →

Tags: हिन्द-युग्म, आशावाद, गजल, मोबाइल, लाज, हेरी पोटर

उम्मीद है हम तुम मिलेंगे3 comments

विनय wrote 1 year ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये दीप जलेंगे जब बसंत की धूप महकेगी उम्मीद है दोनों दिल खिलेंगे … more →

Tags: मेरा गीत, उम्मीद, धूप, इश्क़, Heart, Love, light, Mind, दिल

ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ

विनय wrote 1 year ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार की अदा मैं भी जानता हूँ कितना मन मुकद्दर था उसका यह राज़े-निहाँ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Mind, शिकार, राज़, अदा, निहाँ, Hidden, secret, Poison

नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में2 comments

विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →

Tags: मेरा गीत, धूप, Heart, Mind, बदन, dido, Body, जिया, desert

यह मौसम है मस्त-मस्त

विनय wrote 1 year ago: यह मौसम है मस्त-मस्त यह आलम है मस्त-मस्त अम्बर पे छायी काली घटा सावन बरसे कर दे मस्त यह मौसम है मस्त … more →

Tags: मेरा गीत, आलम, इश्क़, Love, मौसम, सावन, प्यार, मोहब्बत, Crazy

मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा2 comments

विनय wrote 1 year ago: मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, सपना, dream, Beloved, प्रेम

रोज़े-शामे-दीवाली कोई नूरे-चराग़ नहीं

विनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली   कोई   नूरे – चराग़  नहीं चौखट   सूनी   दिल   वीराँ   तन्हा - … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, चाँद, इश्क़, आतिश, Heart, Love, Flower, प्यार, मोहब्बत

मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं...

विनय wrote 2 years ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →

Tags: मेरी नज़्म, Heart, Mind, दिल, इंतज़ार, Heaven, Attraction, hell, कशिश

मैं अपने मन की राह चुनूंगीं3 comments

Nidhi KM wrote 3 months ago: मैने कयी बार, कभी अपनों के, कभी तुम्हारे कहने पर, नयी सुबह का इंतज़ार किया, नयी माला मे फूल गुथे, नय … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, इंतज़ार, कभी, काली रात, खुशबू, घर, जीवन, तुम्हारे

रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दोहे, धर्म, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी

आज फिर मन उदास है, 1 comment

Nidhi KM wrote 6 months ago: आज फिर मन उदास है, कोई अपना नही पास है…               चल रही हूँ जिन रहो मे,               कभी … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, अपना, आँधियारों, आज, आदत, आस, उदास, कभी


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