यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह ब… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 1 month ago: यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार य … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: सनक गई सकून मिला अन्धेरे से उजाले तक द … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार क … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: यह मौसम है मस्त-मस्त यह आलम है मस्त-मस् … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयस … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: रोज़े - शामे - दीवाली कोई नूरे - चराग़ न … more →
विनय प्रजापति wrote 1 year ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे … more →