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रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 12 hours ago: रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दोहे, धर्म, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी

रहीम संदेशः अच्छी नीयत से काम करें तो मनुष्य क्या परमात्मा मिल जाते हैं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: <strong>रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय</strong … more →

Tags: हिंदी, हिंदी पत्रिका, Deepak bharatdeep, hindi megzine, Hindi writing, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran

जाने वो पल कहाँ खो गए8 comments

kmuskan wrote 9 months ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प … more →

Tags: Zindagi, Kavita, muskan, hindi, Poetry, kala, Blogroll, पल, चाँद

मन में हैं दस-बीस...1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: सतरंगी भाव उमड़ते हैं, दौड़ते हैं, तेज़ दौड़ते हैं इतने तेज़ कि कुछ स्पष्ट नहीं रह पाता मानो ऊर्जा से चा … more →

Tags: लेख/आलेख, सतरंगी भाव, सोच

मेरे मन 1 comment

माधव त्रिपाठी wrote 9 months ago: मन तुझे खुली छूट है उदास होने के लिए, आंसू बहा – बहा रोने के लिए तू चाहे तड़पना अगर तो तड़प जी … more →

Tags: मेरी कवितायें, खुशी

यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया2 comments

विनय wrote 11 months ago: यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह बदलना था तुम्हें तो मुझ … more →

Tags: रुबाइयाँ, Heart, Mind, सावन, दिल, rain, ग़म, तेवर, रोना

उजाले तक2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: सनक गई सकून मिला अन्धेरे से उजाले तक दावा नहीं दया पहुंची जीगर के छाले तक लेपटोप पंहुच गये गांव में … more →

Tags: हिन्द-युग्म, आशावाद, गजल, मोबाइल, लाज, हेरी पोटर

उम्मीद है हम तुम मिलेंगे3 comments

विनय wrote 1 year ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये दीप जलेंगे जब बसंत की धूप महकेगी उम्मीद है दोनों दिल खिलेंगे … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, उम्मीद, कली, ख़त, ख़ुशबू, घर, दिल, दीप

ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ

विनय wrote 1 year ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार की अदा मैं भी जानता हूँ कितना मन मुकद्दर था उसका यह राज़े-निहाँ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Mind, शिकार, राज़, अदा, निहाँ, Hidden, secret, Poison

नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में2 comments

विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →

Tags: मेरा गीत, धूप, Heart, Mind, बदन, dido, Body, जिया, desert

यह मौसम है मस्त-मस्त

विनय wrote 1 year ago: यह मौसम है मस्त-मस्त यह आलम है मस्त-मस्त अम्बर पे छायी काली घटा सावन बरसे कर दे मस्त यह मौसम है मस्त … more →

Tags: मेरा गीत, आलम, इश्क़, Love, मौसम, सावन, प्यार, मोहब्बत, Crazy

मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा2 comments

विनय wrote 1 year ago: मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, सपना, dream, Beloved, प्रेम

रोज़े-शामे-दीवाली कोई नूरे-चराग़ नहीं

विनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली   कोई   नूरे – चराग़  नहीं चौखट   सूनी   दिल   वीराँ   तन्हा - … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, चाँद, इश्क़, आतिश, Heart, Love, Flower, प्यार, मोहब्बत

मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं...

विनय wrote 1 year ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →

Tags: मेरी नज़्म, Heart, Mind, दिल, इंतज़ार, Heaven, Attraction, hell, कशिश


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