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Blogs about: मरासिम

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सम्बन्ध1 comment

त्रिपुरारि कुमार शर्मा wrote 4 months ago: झुलस रहा है मेरे जिस्म का कोना-कोना रूह को आग लग गई जैसे कुछ दिनों से दिन-रात मेरी आंखों में कोई तकल … more →

Tags: कविता, सम्बन्ध, त्रिपुरारि, खत, रूह

दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते9 comments

विनय wrote 9 months ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, चाँद, Heart, दिल, शाम, ख़ुदा, Separation, तस्व्वुर, आँसू

निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में

विनय wrote 1 year ago: निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में ज़्यादा को इक रोज़ ज़हर होना था अब तू ही बता, मैं तुझसे जुदा किधर जाऊँ … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, जुदा, निख्खा, प्यार, मोहब्बत, शक्कर, ज़हर, ज़्यादा

शाम से आँख में नमी सी है

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →

Tags: Jagjit Singh, जगजीत सिंह, Gulzar, Sony, गुलज़ार, Marasim, Shaam Se Aankh Mein Nami Se Hai, Sony Music, Non Films

मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते1 comment

विनय wrote 2 years ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से … more →

Tags: मेरी नज़्म, चाँद, इश्क़, Love, eyes, प्यार, मोहब्बत, रात, पत्ते

लहर इक ‘विनय’

विनय wrote 2 years ago: लहर इक ‘विनय’ टकराया जो पत्थर से टूट गया जब भी निकला आगे उसके हाथों से एक हाथ छूट गया जब भी बैठता है … more →

Tags: मेरी नज़्म, दोस्त, Heart, Love, दिल, Pain, Solitude, पत्थर, deserted

मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं...

विनय wrote 2 years ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →

Tags: मेरी नज़्म, Heart, Mind, दिल, इंतज़ार, Heaven, Attraction, hell, कशिश


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