आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है कल तक जिसके लिए दिल दिवाना लगता है निगाहों में हैं सारे अंदाज़ आज भी वही मगर ख़ामोशी में नया अफ़साना लगता है हो मशरूफ़ वह अपने कामों में क्या पता बड़ा ख़राब उसका नज़रें … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है कल तक जिसके लिए दिल दिवाना लगता है निगाहों में हैं सारे अंदाज़ आज … more →