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Blogs about: मस्तराम

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दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago:   कभी गम तो कभी खुशी कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ कविता लिखने का ख्याल किया तब भाषा सज … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, कला, मनोरंजन

ज़िंदगी और परदे का सच-हिंदी व्यंग्य कविताएँ (zindagi aur parde ka sach-hindi vyangya kavitaen)

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago:  इस देश का आदमी उड़ना चाहता है ऊंची उड़ान अपने पांवों में पुरानी ज़जीरों को बांधकर. अपनी आँखों स … more →

Tags: arebic, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, bharat, Blogging, कला

पैसे से गाडी खरीदी है रास्ता नहीं-व्यंग्य चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, व्यंग्य कविता, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

सम्मान का भ्रम-हिन्दी हास्य व्यंग्य (samman ka bhram-hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: दीपक बापू तेजी से अपनी राह चले जा रहे थे कि पान की एक दुकान के पास खड़े आलोचक महाराज ने उनको आवाज देक … more →

Tags: arebic, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, व्यंग्य, शब्द, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

ईमानदारी में गज़ब कैसा-हिन्दी हास्य व्यंग्य (imandari men gazab- hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: सप्ताह में उस दुकान से एक बार तो बेकरी का सामान जरूर खरीदते हैं। ऐसा बरसों से चल रहा है। वह दुकानदार … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, व्यंग्य चिंतन, हास्य व्यंग्य

भाषा का लफड़ा-हिन्दी हास्य व्यंग्य (bhasha ka lafada-hindi commedy satire

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, सूचना, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi abhivyakti, Hindi Blogging

वादा और इंतजार-व्यंग्य कविता (vada aur intzar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, व्यंग्य कविता, Internet, arebic, क्षणिका, Blogging, Friends

फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

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हमदर्दी कला-व्यंग्य कविता (art of sypothy)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →

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योगासन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा-हिन्दी लेख (hindi lekh on yogasan)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से द … more →

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ज़िन्दगी के देखे दो ही रास्ते-हिंदी कविता (zindagi ke do raste-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: ज़िन्दगी के देखे दो ही रास्ते एक बागों की बहार दूसरा उजाड़ की कगार का. चलती है टांगें मकसद तय करता ह … more →

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ख्वाहिशें हमेशा बनी रही यार-हिंदी कविता (khavahishen-hindi kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: यूं तो दर-ब-दर भटकते रहे इस नीले आसमान के नीचे। कभी सोचा न था कि इस दौर में भी छप रहे हैं धरती पर हम … more →

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युद्ध और सत्संग-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: धर्म के लिए अब नहीं होता सत्संग हर कोई लड़ रहा है, उसके नाम पर जंग. किताबों के शब्द का सच अब तलवार स … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कविता, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, दृश्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu

सामूहिक ठगी का मतलब-व्यंग्य चिंत्तन (samuhik thagi ka matlab-vyangya lekh)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह … more →

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रामचरित मानस की चर्चा-चिंतन आलेख (ramcharit manas-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन … more →

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रौशनी और अंधेरे की जंग-लघुकथा (roshni aur andher ke jang-hindi laghu katha)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वैसे तो उन सज्जन की कोई इतनी अधिक उम्र नहीं थी कि दृष्टिदोष अधिक हो अलबत्ता चश्मा जरूर लगा हुआ था। ए … more →

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भीड़ में अपनी पहचान मत ढूंढो-व्यंग्य कविता (pahchan-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भीड़ में अपनी पहचान ढूंढते हुए क्यों अपना वक्त बर्बाद करते हो. भीड़ जुटाने वाले सौदागरों के लिए हर श … more →

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प्रजातंत्र में ब्लॉग की महत्वपूर्ण भूमिका-हिंदी लेख (democracy and hindi blog-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →

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