तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे और सात्विक प्रयास करने पर कोई सत्कर्म सिद्ध नहीं भी होता है तो भी बुद्धिमान पुरुष को अपने अंदर ग्लान… more →
** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrikaदीपक भारतदीप wrote 1 hour ago: दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 hour ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: भूखे पेट भजन नहीं होते-यह सच है पर साथ ही यह भी एक तथ्य है कि भूखे पेट गोलियां या तलवार नहीं चलती। द … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सप्ताह में उस दुकान से एक बार तो बेकरी का सामान जरूर खरीदते हैं। ऐसा बरसों से चल रहा है। वह दुकानदार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: बुद्धिजीवियों का सम्मेलन हो रहा था। अनेक प्रकार के बुद्धिजीवियों को उसमें आमंत्रण दिया गया। यह सम्मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस दिन एक संत को हमने पेट में अन्न पचाने का मंत्र बताते हुए सुना। वह सुबह, दोपहर और रात को भोजन करने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया और हाथ में देते हुए बोला- ‘दीपक बापू, बूढ़े आदमियों के लिये तैयार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सारे जहां की प्यास मिटा सको तुम वह समंदर बनना. भेजे जो आकाश में पानी भरकर मेघ जहां लोग पानी को तरसे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सपने जैसे शहर में ख्वाब लगती उस इमारत की छत के नीचे रौशनी की चमक से आंखें चुंधिया गयी हैं फिर याद आत … more →