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Blogs about: मस्त राम

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मनोरंजन की राह-हिंदी व्यंग्य कविता (manoranjan ki rah-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 1 hour ago: दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फ … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, हास्य कविता, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, कला

तेरी भाषा, मेरी भाषा-व्यंग्य लेख

दीपक भारतदीप wrote 1 hour ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, कला, भाषा विवाद, मनोरंजन, मस्ती, समाज

भूख और बन्दूक-हिंदी लेख (Hunger and gun - Hindi article)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: भूखे पेट भजन नहीं होते-यह सच है पर साथ ही यह भी एक तथ्य है कि भूखे पेट गोलियां या तलवार नहीं चलती। द … more →

Tags: हिन्दी, hindu thinking, Hindu Thought!, India, inglish, web bhaskar, web bharat, web dunia, web duniya

पैसे से गाडी खरीदी है रास्ता नहीं-व्यंग्य चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bapu

ईमानदारी में गज़ब कैसा-हिन्दी हास्य व्यंग्य (imandari men gazab- hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सप्ताह में उस दुकान से एक बार तो बेकरी का सामान जरूर खरीदते हैं। ऐसा बरसों से चल रहा है। वह दुकानदार … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन

भाषा का लफड़ा-हिन्दी हास्य व्यंग्य (bhasha ka lafada-hindi commedy satire

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, सूचना, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi abhivyakti

फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्तराम, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Family, Friends, hasya kavita, hasya vyang, hasya -vyangya

सामूहिक ठगी का मतलब-व्यंग्य चिंत्तन (samuhik thagi ka matlab-vyangya lekh)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, हिन्दी, Deepak bharatdeep, hasya -vyangya, hindu thinking, Hindu Thought!

अपनी रचनाएँ भुनाओ-हास्य कविता (apni rachna-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, India, व्यंग्य, हास्य, अनुभूति, शायरी, दीपक भारतदीप, web dunia

हिंदी आध्यात्मिक सन्देश-बेकार के कम न करें तो ही ठीक (vidur niti-bekar kam n karen)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे … more →

Tags: arebic, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, चिंतन, दीपक भारतदीप, शब्द, समाज

कौटिल्य दर्शन-दोस्त और दुश्मन दो प्रकार के होते हैं (kautilya darshan-dost aur dushman)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, alekh, arebic, Article, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन

भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  ————————— … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, आलेख, कला, चिंतन, दीपक भारतदीप, सन्देश, समाज, हिन्दी

दूसरी किताब-हास्य व्यंग्य (doosri kitab- hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: बुद्धिजीवियों का सम्मेलन हो रहा था। अनेक प्रकार के बुद्धिजीवियों को उसमें आमंत्रण दिया गया। यह सम्मे … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, हास्य व्यंग्य

अन्न की तरह धन पचने का भी मंत्र हो तो अच्छा-हिंदी हास्य व्यंग्य (hasya vyangya in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस दिन एक संत को हमने पेट में अन्न पचाने का मंत्र बताते हुए सुना। वह सुबह, दोपहर और रात को भोजन करने … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, सूचना, हास्य व्यंग्य

सेल के रोग का इलाज नहीं-हास्य व्यंग्य कविता (sel rog ka ilaj-hasya vyangyakavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया और हाथ में देते हुए बोला- ‘दीपक बापू, बूढ़े आदमियों के लिये तैयार … more →

Tags: मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

तुम वह समंदर बनना-हिंदी कविता (tum samandar banna-hindi kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सारे जहां की प्यास मिटा सको तुम वह समंदर बनना. भेजे जो आकाश में पानी भरकर मेघ जहां लोग पानी को तरसे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, समाज, सूचना, हंसना

दिवाली का शुभ दिन बीत गया-आलेख (hindi article on diwali festival

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, साहित्य, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

दीपावली का पर्व निकल गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, संपादकीय, darshan, India, व्यंग्य, सन्देश, साहित्य, Deepak bharatdeep

ख्वाब जब हकीकत बनते हैं-हिन्दी शायरी (khavab aur haqiqut-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सपने जैसे शहर में ख्वाब लगती उस इमारत की छत के नीचे रौशनी की चमक से आंखें चुंधिया गयी हैं फिर याद आत … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य कविता


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