आ री सखी चलें फिर वहीं जहाँ पहली बार मिले थे जहाँ सपनों की गलियाँ छूटी थीं हक़ी… more →
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: आ री सखी चलें फिर वहीं जहाँ पहली बार मि … more →
Tags: मेरा गीत, इश्क़, चाँदनी, सखी, बहार, गलियाँ, हक़ीक़त, दरवाज़े, बुनियाद
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