Nidhi KM wrote 3 months ago: तुमसे ज़्यादा और ज़्यादा पाने की और तुम्हे देने ख़्वाहिश है तुम्हारी बाहों मे जीने और मरने की ख़्वाह … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप अब यह आलम है दिलो-ज़हन का करता हूँ हर शै म … more →
विनय wrote 2 years ago: आज महसूस किया मैंने गर तुम्हें किसी और के साथ देखूँ तो मेरे दिल पे क्या गुज़रेगी कैसा महसूस करूँगा बा … more →
विनय wrote 2 years ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने में दर्द है तो सही… लम्हा-लम्हा जज़्बात पिघलते हैं ग़म की चि … more →