पश्चात्तपनिवृत्यर्थं परित्यागो विचार्यते। स मार्गाद्वितये प्रोक्तो भक्तौ ज्ञाने विशेषतः॥१॥ कर्म मार्गे न कर्त्तव्यः सुतरां कलिकालतः। अत आदौ भक्तिमार्गे कर्त्तव्यत्वाद्विचारणा॥२॥ श्रवणादिप्रसिद्धयर्थं … more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: पश्चात्तपनिवृत्यर्थं परित्यागो विचार्यते। स मार्गाद्वितये प्रोक्तो भक्तौ ज्ञाने विशेषतः॥१॥ कर्म मार् … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: श्रीकृष्णरसविक्षिप्तमानसा रतिवर्जिताः। अनिर्वृतालोकवेदे ते मुख्याः श्रवणोत्सुकाः॥१॥ विक्लिन्नमनसो ये … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: यथा भक्तिः प्रवृद्धा स्यात्तथोपायो निरूप्यते। बीजभावे दृढ़े तु स्यात्यागाच्छवण कीर्त्तनात्॥१॥ बीजदाढ … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: पुष्टिप्रवाह मर्यादा विशेषेण पृथक पृथक। जीव-देह-क्रियाभेदैः प्रवाहेण फलेन च॥१॥ वक्ष्यामि सर्वसन्देहा … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: नत्वा हरिं प्रवक्ष्यामि स्वसिद्धांत विनिश्चयम। कृष्ण सेवा सदा कार्या मानसी सा परा स्मृता॥१॥ चेतस्तस् … more →