रविवार ३१ मई २००९ को काव्य धारा लन्दन के विशेष कार्यक्रम में पुष्पा भार्गव के काव्य संग्रह ‘लहरें’ का विमोचन भारतीय उच्चायोग की संस्कृति मंत्री तथा नेहरू केंद्र की निर्देशिका श्री मती मोन… more →
मंथनमहावीर wrote 1 week ago: रविवार ३१ मई २००९ को काव्य धारा लन्दन के विशेष कार्यक्रम में पुष्पा भार्गव के काव्य संग्रह ‘ल … more →
महावीर wrote 7 months ago: आतंक के युद्ध में जीत!!! यह सब से बड़ा आतंकी हमला था। १० आतंकियों को मार कर आतंक के खिलाफ यह जंग ज … more →
महावीर wrote 9 months ago: कविता पुरानी है किंतु कुछ शब्दों में संशोधन करके यहां दुबारा लिख रहा हूं। पुरानी टिप्पणियां भी यथाव … more →
महावीर wrote 2 years ago: एक बेटी का अभागा पिता लेखकः महावीर शर्मा साभारः “कादम्बिनी” मार्च 2006 लन्दन 15 जुलाई, … more →
महावीर wrote 2 years ago: तरकश पर सागर चन्द नाहर जी का सुप्रसिद्ध गायक अदनान सामी के मुटापे और १०८ किलो वजन कम करने की कहानी प … more →
महावीर wrote 2 years ago: नारद जी सोच रहे थे कि मृत्यु-लोक (पृथ्वी) में जाकर एक गिटार ले लिया जाए। युगयुगांतरों के समय की सीढ़ … more →
महावीर wrote 2 years ago: “एंग्लो-इस्टाईल से ऐसे डाइलाग मारती है कि विलन की तो बोलती बंद हो जाती है। जब तर्राटे का हाथ म … more →
महावीर wrote 2 years ago: “मेरा बेटा लौटा दो!!”- (एक सत्य घटना पर आधारित कहानी) महावीर शर्मा लखनऊ में खटीक समुदाय … more →
महावीर wrote 2 years ago: बुढ़ापा! जवाँ जब वक़्त की दहलीज़ पर आंसू बहाता है, बुढ़ापा ज़िंदगी को थाम कर जीना सिखाता है। पुराने … more →
महावीर wrote 2 years ago: जब वतन छोड़ा…… महावीर शर्मा जब वतन छोड़ा, सभी अपने पराए हो गए आंधी कुछ ऐसी चली नक़्शे क़दम भी खो ग … more →
महावीर wrote 2 years ago: ‘दिल की गीता’ महावीर शर्मा घूमते घामते एक पुरानी किताबों की दुकान के भीतर चला ग … more →
महावीर wrote 2 years ago: भूल कर ना भूल पाए, वो भुलाना याद है पास आये, फिर बिछड़ कर दूर जाना याद है हाथ ज़ख्मी हो गए, इक फूल … more →
महावीर wrote 3 years ago: “हिन्दी का गला घुट रहा है!” अंग्रेज़ी-पुच्छलतारे नुमा व्यक्ति जब बातचीत में हिन्दी के शब … more →
महावीर wrote 3 years ago: ‘ दहकते सांसों से ’ जवानी जब करवट बदलती है तो बुढ़ापे के मुहाने पर लाकर पटक देती है। इंसान यादों क … more →
महावीर wrote 10 months ago: क़ातिल सिसकने क्यूं लगा – ग़ज़ल ग़ज़ल का हर शे’र अपने आप में संपूर्ण और स्वतंत्र होता है। यह आ … more →
महावीर wrote 11 months ago: मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” भाग 2 सूचनाः देखने वालों के अनुरोध पर ‘मुशायरे क … more →
महावीर wrote 11 months ago: मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” (पहला भाग) दोस्तों, प्राण शर्मा जी का और मेरा (महावीर शर्मा) आप स … more →
महावीर wrote 1 year ago: वसीयत – कहानी लेखकः महावीर शर्मा (साभारः सरिता, दिसंबर-प्रथम २००६) सुबह नाश्ते के लिये कुर्सी … more →
महावीर wrote 1 year ago: ग़म की दिल से दोसती होने लगी। ज़िन्दगी से दिल्लगी होने लगी। जब मिली उसकी निगाहों से मिरी उसकी धड़कन … more →