प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: … more →
अनिल कुमार wrote 3 months ago: बच्चों की देखभाल करना एक साथ दो नौकरियाँ करने जैसा है, वो भी बिना पैसे की। Looking after a baby is … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 3 months ago: सुदामा प्रसाद पाण्डेय “धूमिल” की एक और कविता आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। पता नहीं क्य … more →
दरभंगिया wrote 4 months ago: आजकल रात बहुत छोटी होती है थोड़ी थोड़ी देर में बिटिया रोने लगती है कभी कभी कुढन भी होने लगती है नहीं क … more →
दरभंगिया wrote 5 months ago: माँ तो सबकी होती है मेरी थोड़ी अनोखी है कुछ ऐसे छुप कर बैठी है जैसे जन्म से मुझ से रूठी है हाँ सुना ह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: जय जननी, जय शक्तिदायिनी, नवदुर्गा माँ! १ जय अपर्णा! हिमालय तनया, शैलपुत्री माँ! २ जय भवानी, जय ब् … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: बचपन में ही मोना ने ज़िंदगी का फलसफ़ा समझ लिया था। पिता शराबी थे। उसने उन्हें कभी बिना नशे के नहीं देख … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन सब के दिल में यही जज्बात होंगे | ये चार लाईने मैं अपनी माँ क … more →
विनय wrote 1 year ago: मोहब्बत तेरी याद है तेरी हर बात याद है साथ तू नहीं तो क्या साथ तेरी याद है मैं कहाँ था गर तू न होती … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: माँ सुनाओ मुझे वो कहानी, जिसमे राजा न हो न हो रानी, जो हमारी तुम्हारी कथा हो, जो सभी के ह्रदय की गाथ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: तुम! मां हो मेरा पूरा जहां हो। संसार में आए हैं तुमसे, तुमने ही परिचय कराए हैं सबसे। तुम्हारी पूजा क … more →