आज से नवरात्र शुरु हो गए हैं। जब से होश संभाला था अपनी जननी को श्रद्धा-विश्वास और भक्ति के साथ-साथ कड़े अनुशासन से दुर्गा माँ की पूजा और आराधना करते देखा था। अनायास वो सब याद आ गया। जब हम बहुत छोटे थे … more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: आज से नवरात्र शुरु हो गए हैं। जब से होश संभाला था अपनी जननी को श्रद्धा-विश्वास और भक्ति के साथ-साथ क … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: … more →
अनिल कुमार wrote 7 months ago: बच्चों की देखभाल करना एक साथ दो नौकरियाँ करने जैसा है, वो भी बिना पैसे की। Looking after a baby is l … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 8 months ago: सुदामा प्रसाद पाण्डेय “धूमिल” की एक और कविता आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। पता नहीं क्यो … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: जय जननी, जय शक्तिदायिनी, नवदुर्गा माँ! १ जय अपर्णा! हिमालय तनया, शैलपुत्री माँ! २ जय भवानी, जय ब्र … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: बचपन में ही मोना ने ज़िंदगी का फलसफ़ा समझ लिया था। पिता शराबी थे। उसने उन्हें कभी बिना नशे के नहीं देख … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन सब के दिल में यही जज्बात होंगे | ये चार लाईने मैं अपनी माँ क … more →
विनय wrote 1 year ago: मोहब्बत तेरी याद है तेरी हर बात याद है साथ तू नहीं तो क्या साथ तेरी याद है मैं कहाँ था गर तू न होती … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: माँ सुनाओ मुझे वो कहानी, जिसमे राजा न हो न हो रानी, जो हमारी तुम्हारी कथा हो, जो सभी के ह्रदय की गाथ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: तुम! मां हो मेरा पूरा जहां हो। संसार में आए हैं तुमसे, तुमने ही परिचय कराए हैं सबसे। तुम्हारी पूजा क … more →